श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: सभी भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट वापस भेजने के दिए संकेत
देश की राजधानी नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के चर्चित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े एक अहम कानूनी पेंच पर सुनवाई की है। बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने संकेत दिया कि सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इस महत्वपूर्ण मुद्दे से जुड़ी याचिका को वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट के पास भेजा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने इस बात पर खास तौर पर गौर किया कि हाईकोर्ट ने अन्य हिंदू पक्षों को नोटिस जारी किए बिना ही अचानक एक पक्ष को सभी श्रद्धालुओं का आधिकारिक प्रतिनिधि मान लिया था।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि संबंधित आवेदन मूल रूप से किसी अन्य विषय के लिए दायर किया गया था और इसमें सभी संबंधित वादियों को नोटिस तक जारी नहीं किया गया था। इसी प्रक्रियागत खामी को देखते हुए अदालत ने इस मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस हाईकोर्ट भेजने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी 2 सितंबर की तारीख तय कर दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत को वकीलों की ओर से यह भी अवगत कराया गया कि मुख्य याचिकाकर्ता के चयन और प्रतिनिधित्व को लेकर विभिन्न हिंदू पक्षों के बीच आपस में अनौपचारिक बातचीत चल रही है। कुछ हिंदू पक्षों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी शीर्ष अदालत से यह अनुरोध किया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर नए सिरे से विधिवत फैसला लेने के लिए मामले को वापस हाईकोर्ट के पास भेज दिया जाए।
क्या है पूरा विवाद और हाईकोर्ट का आदेश?
यह पूरी कानूनी लड़ाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस पूर्व आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जा रही है, जिसमें एक विशेष हिंदू पक्ष को तमाम भगवान कृष्ण भक्तों का एकमात्र प्रतिनिधि मान लिया गया था। हाईकोर्ट ने वाद संख्या 17 (2023) के वादी द्वारा प्रस्तुत आवेदन को स्वीकार करते हुए इसे अन्य सभी पेंडिंग याचिकाओं का मुख्य प्रतिनिधि मामला घोषित कर दिया था और यह निर्देश दिया था कि इसी की सुनवाई सबसे पहले की जाएगी।
दूसरी ओर, पीड़ित हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क रखा कि मथुरा की स्थानीय अदालत से जब सभी सिविल मुकदमे हाईकोर्ट ट्रांसफर किए गए थे, तब उनके अपने मामले को मुख्य केस के रूप में देखा जा रहा था। उनका आरोप है कि हाईकोर्ट ने प्रक्रियागत अनदेखी करते हुए दूसरे पक्ष को सभी श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि मानकर भूल की है।
मथुरा ईदगाह विवाद का पूरा घटनाक्रम
यह पूरा ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद मथुरा में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद और श्रीकृष्ण जन्मस्थान से जुड़ा हुआ है। हिंदू पक्ष का यह दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने भगवान कृष्ण के पावन जन्मस्थान पर बने प्राचीन मंदिर को बलपूर्वक ध्वस्त कर इस मस्जिद का निर्माण कराया था। इस मालिकाना हक और मुक्ति के दावे को लेकर मथुरा की निचली अदालत में 20 से अधिक अलग-अलग सिविल याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद समिति और विभिन्न हिंदू पक्षों की ओर से कई याचिकाएं लंबित हैं। इसमें वह चर्चित 26 मई 2023 का आदेश भी शामिल है जिसके जरिए सभी मामलों को मथुरा कोर्ट से हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया था। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 16 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी थी जिसमें शाही ईदगाह परिसर का कोर्ट-कमिश्नर के जरिए सर्वे कराने की मंजूरी दी गई थी। अब 2 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर देश भर के श्रद्धालुओं की नजरें टिकी हुई हैं।
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