राज्यसभा चुनाव में भीतरघात पर आर-पार कांग्रेस ने 3 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की ठानी:

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News India Live, Digital Desk : ओडिशा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई ‘क्रॉस वोटिंग’ का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। कांग्रेस ने अपने उन तीन विधायकों के खिलाफ अब निर्णायक जंग छेड़ दी है, जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर वोट किया था। पार्टी ने इन विधायकों को पहले ही सस्पेंड कर दिया था, लेकिन अब उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर के सामने ‘एंटी-डिफेक्शन लॉ’ (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत याचिका दायर कर दी है। कांग्रेस के इस कड़े रुख से राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है।

विधायक राजेन एक्का बोले ‘सबूत तैयार हैं, कोर्ट तक जाएंगे’

इस पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी देते हुए कांग्रेस विधायक राजेन एक्का ने बताया कि पार्टी ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त न करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, “हमने अपने तीन विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के पास याचिका दायर की है। दो विधायकों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश कर दिए गए हैं और तीसरे के खिलाफ भी जल्द ही साक्ष्य सौंप दिए जाएंगे।” एक्का ने यह भी साफ किया कि यदि वे स्पीकर के फैसले से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

इन 3 चेहरों पर गिरी गाज, शरद यादव केस का दिया हवाला

कांग्रेस ने जिन विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोला है, उनमें सनाखेमुंडी के रमेश चंद्र जेना, मोहना के दशरथी गोमांगो और बाराबती-कटक की महिला विधायक सोफिया फिरदौस शामिल हैं। पार्टी ने स्पीकर से मांग की है कि जिस तरह राज्यसभा में शरद यादव की सदस्यता रद्द की गई थी, ठीक उसी तर्ज पर इन विधायकों की सीटें भी रद्द की जाएं। राजेन एक्का के मुताबिक, पार्टी जल्द ही रमेश जेना के खिलाफ भी अयोग्यता की मांग को लेकर प्रक्रिया तेज करेगी।

क्रॉस वोटिंग ने बिगाड़ा गणित, BJP समर्थित उम्मीदवार की हुई जीत

ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस के पास कुल 14 विधायक हैं। राज्यसभा की चौथी सीट के लिए कांग्रेस ने बीजेडी (BJD) उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को समर्थन देने का फैसला किया था। हालांकि, मतदान के दौरान कांग्रेस और बीजेडी के कुछ विधायकों ने पाला बदल लिया। इस ‘क्रॉस वोटिंग’ का सीधा फायदा बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे को मिला और उन्होंने जीत दर्ज की। इस उलटफेर ने न केवल विपक्ष को झटका दिया, बल्कि बीजेपी को दो सुरक्षित सीटों के साथ एक अतिरिक्त सीट पर बढ़त दिला दी।

क्या है आगे की रणनीति?

कांग्रेस नेतृत्व अब इस मामले को कतई ठंडा नहीं होने देना चाहता। पार्टी का मानना है कि अगर इन बागी विधायकों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में कैडर के बीच गलत संदेश जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं। अगर इन तीनों विधायकों की सदस्यता रद्द होती है, तो ओडिशा में तीन सीटों पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है, जो राज्य की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के लिए नई अग्निपरीक्षा साबित होगी।

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