मनमोहन सिंह के जो थे सबसे भरोसेमंद, अब बने मोदी सरकार के ‘संकटमोचक’; नाम सुनते ही बैकफुट पर आया विपक्ष Once Manmohan Singh’s most trusted aide, he has now become the Modi government’s ‘crisis-solver’; the Opposition went on the back foot the moment his name was mentioned.
भारतीय राजनीति और सत्ता के गलियारों में शह-मात का एक ऐसा दिलचस्प खेल देखने को मिल रहा है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया है। कभी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौर में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के सबसे खास और रणनीतिक रूप से बेहद भरोसेमंद रहे एक दिग्गज प्रशासनिक चेहरे ने अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) यानी मोदी सरकार के सबसे बड़े ‘संकटमोचक’ (Troubleshooter) के रूप में कमान संभाल ली है। कूटनीति और प्रशासनिक सुधारों के इस माहिर खिलाड़ी का नाम जैसे ही सामने आया, वैसे ही सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा विपक्ष पूरी तरह चित हो गया।
नीतिगत फैसलों से लेकर राजनीतिक घेराबंदी तक सबसे मजबूत ढाल
इस शीर्ष रणनीतिकार की भूमिका सिर्फ प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के सामने आने वाले हर नीतिगत और राजनीतिक संकट के समय ये एक मजबूत ढाल बनकर सामने खड़े दिखाई देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में कई संवेदनशील विधेयकों और नीतिगत गतिरोधों को सुलझाने में इन्होंने परदे के पीछे से बेहद अहम भूमिका निभाई है। विपक्ष के पास इस दिग्गज के तर्कों और प्रशासनिक तजुर्बे का कोई तोड़ नहीं है, यही वजह है कि जब भी यह चेहरा मोर्चे पर आता है, विरोधी खेमे की रणनीतियां धरी की धरी रह जाती हैं।
मनमोहन सरकार से मोदी सरकार तक: क्यों खास है यह प्रशासनिक सफर?
डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश के कई बड़े आर्थिक और नीतिगत फैसलों का ब्लूप्रिंट तैयार करने वाले इस चेहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अटूट भरोसा जताया है। इसे सत्ता के गलियारों में ‘परफॉर्मेंस ओवर पॉलिटिक्स’ (राजनीति से ऊपर काम) का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। मोदी सरकार ने इनके व्यापक अनुभव, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पकड़ और जटिल से जटिल मुद्दों को शांति से सुलझाने की क्षमता को देखते हुए इन्हें सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इनका यह सफर दिखाता है कि प्रतिभा और काबिलियत किसी भी सरकार के लिए कितनी अपरिहार्य होती है।
दिल्ली की सत्ता से लेकर राज्यों के सियासी समीकरणों पर बड़ा असर
भौगोलिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ दिल्ली के नीतिगत गलियारों (लुटियंस दिल्ली) में इस संकटमोचक की मौजूदगी का असर अब साफ दिखने लगा है। विभिन्न राज्यों के साथ केंद्र सरकार के समन्वय और जटिल क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने में इनकी भूमिका बेहद प्रभावी साबित हो रही है। इस प्रशासनिक फेरबदल और नए समीकरणों ने यह साफ कर दिया है कि मोदी सरकार अपनी योजनाओं को धरातल पर उतारने और विपक्ष के चक्रव्यूह को भेदने के लिए देश के सबसे बेहतरीन दिमागों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटने वाली है।
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