पर्यावरण संरक्षण को लेकर संसदीय समिति सख्त, NGT को दिए अपने ‘स्वतः संज्ञान’ अधिकारों का अधिक सक्रियता से उपयोग करने के निर्देश Parliamentary committee takes a tough stand on environmental protection, directs NGT to use its ‘suo motu’ powers more proactively
देश में लगातार बिगड़ते पर्यावरण संतुलन और प्रदूषण की गंभीर समस्याओं को देखते हुए संसद की एक स्थायी समिति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को बेहद सख्त और महत्वपूर्ण सलाह दी है। संसदीय समिति ने एनजीटी से आग्रह किया है कि वह राजमार्गों के निर्माण के लिए धड़ल्ले से काटे जा रहे पेड़ों, नदी किनारों पर चल रहे अवैध बालू (रेत) खनन और दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा जैसे संवेदनशील मामलों में अपने ‘सुओ मोटो’ (स्वतः संज्ञान) के अधिकारों का अधिक से अधिक और सक्रियता से इस्तेमाल करे। समिति का मानना है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में एनजीटी को अब और अधिक आक्रामक और त्वरित रुख अपनाने की जरूरत है, ताकि देश के प्राकृतिक संसाधनों को बचाया जा सके।
गंगा-यमुना के मैदानों से लेकर पूर्वोत्तर तक के पारिस्थितिकीय जोखिम
कानून और कार्मिक से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने हाल ही में संसद के दोनों सदनों में “देश में न्यायाधिकरण प्रणाली की कार्यप्रणाली की समीक्षा” पर अपनी एक विस्तृत और महत्वपूर्ण रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि एनजीटी को केवल शिकायतों के आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि स्वतः संज्ञान लेकर गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर कड़े कदम उठाने चाहिए। समिति ने जिन प्रमुख चिंताओं का जिक्र किया है उनमें दिल्ली और गंगा-यमुना के मैदानी इलाकों में फैलता खतरनाक वायु प्रदूषण, नदियों का बढ़ता प्रदूषण, अनियोजित तरीके से बन रही ऊंची इमारतें, पूर्वोत्तर राज्यों के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को पहुंच रहा नुकसान और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा अवैध खनन शामिल हैं।
आदेशों के त्वरित अनुपालन और मजबूत फॉलो-अप पर जोर
पर्यावरण मामलों पर फैसला सुनाने के बाद उनके कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए संसदीय समिति ने न्यायाधिकरण और पर्यावरण मंत्रालय को भी कई जरूरी निर्देश दिए हैं। समिति ने सिफारिश की है कि एनजीटी द्वारा दिए जाने वाले आदेशों का जमीनी स्तर पर त्वरित और प्रभावी अनुपालन होना चाहिए। इसके लिए संयुक्त समितियों का बेहतर उपयोग, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और नियमित एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने की व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि यदि संसदीय समिति की इन सिफारिशों पर पूरी सख्ती से अमल किया गया, तो देश में पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने में काफी मदद मिलेगी।
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