पंजाब के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर पर ED का शिकंजा मनी लॉन्ड्रिंग केस में चंडीगढ़-लुधियाना समेत 11 ठिकानों पर छापेमारी
News India Live, Digital Desk:पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी (DIG) हरचरण सिंह भुल्लर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार (27 अप्रैल, 2026) की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में भुल्लर और उनके करीबियों से जुड़े पंजाब और चंडीगढ़ के 11 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। दिल्ली और जालंधर यूनिट के अधिकारियों की इस छापेमारी ने पुलिस महकमे और सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
CBI की FIR के बाद ED की एंट्री ED की यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भुल्लर के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले पर आधारित है। पिछले साल अक्टूबर (2025) में सीबीआई ने भुल्लर को रोपड़ रेंज के डीआईजी रहते हुए एक स्क्रैप कारोबारी से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उन्होंने एक केस को रफा-दफा करने के लिए अपने बिचौलिए के जरिए लाखों रुपये की मांग की थी। अब ED इस बात की जांच कर रही है कि भ्रष्टाचार से कमाई गई इस रकम को कहां-कहां ‘व्हाइट’ किया गया और किन बेनामी संपत्तियों में निवेश किया गया।
चंडीगढ़ सेक्टर-40 स्थित आवास पर लंबी छापेमारी ED की टीमों ने चंडीगढ़ के सेक्टर-40 स्थित भुल्लर के सरकारी आवास के अलावा लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में भी छापेमारी की। जांच एजेंसी को शक है कि भुल्लर ने अपने पद का दुरुपयोग कर बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। छापेमारी के दौरान टीम ने महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और बेनामी संपत्तियों के पेपर जब्त किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में हुई सीबीआई रेड के दौरान उनके घर से करीब 7.36 करोड़ रुपये कैश और करोड़ों के सोने-चांदी के जेवरात बरामद हुए थे, जिसे अब मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से खंगाला जा रहा है।
क्या है ‘सेवा-पानी’ का पूरा मामला? पूरा मामला तब शुरू हुआ जब फतेहगढ़ साहिब के एक स्क्रैप कारोबारी ने सीबीआई से शिकायत की कि डीआईजी भुल्लर उसके खिलाफ दर्ज एक फर्जी केस को खत्म करने के एवज में 8 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। सीबीआई ने जाल बिछाकर भुल्लर के बिचौलिए को 5 लाख रुपये की पहली किस्त लेते रंगे हाथों पकड़ा था, जिसके बाद डीआईजी की भी गिरफ्तारी हुई। जांच के दौरान भुल्लर के पास 26 लग्जरी घड़ियां और कई महंगी गाड़ियां (ऑडी, मर्सिडीज) भी मिली थीं, जो उनकी घोषित आय से कहीं अधिक थीं।
ED की जांच के मुख्य बिंदु:
मनी लॉन्ड्रिंग: रिश्वत के पैसों को किन शेल कंपनियों या व्यापार में निवेश किया गया।
बेनामी संपत्ति: पंजाब और चंडीगढ़ के बाहर भी बेनामी नाम से खरीदी गई संपत्तियों की तलाश।
विदेशी निवेश: क्या इस काली कमाई का कोई हिस्सा विदेशों में भी भेजा गया है?
आय से अधिक संपत्ति: 50 से अधिक प्रॉपर्टी के दस्तावेजों की गहन जांच।
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