क्या NDA सरकार का साथ देंगे शरद पवार? महिला आरक्षण और परिसीमन पर सुप्रिया सुले ने दिए बड़े संकेत Will Sharad Pawar support the NDA government? Supriya Sule drops major hints regarding women’s reservation and delimitation.
भारतीय राजनीति और विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के लिए इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। महाराष्ट्र की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP (SP) केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ जा सकती है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि आगामी मानसून सत्र के दौरान शरद पवार गुट संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation Bill) से जुड़े अहम विधेयकों पर सरकार का समर्थन कर सकता है। इस बड़े उलटफेर की सुगबुगाहट तब और तेज हो गई जब पार्टी की फायरब्रांड सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विषय पर अपनी रणनीति के संकेत दिए।
विपक्ष की एकजुटता को बड़ा झटका! आखिर क्या है शरद पवार का नया गेम प्लान?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि शरद पवार गुट सरकार के इस बेहद महत्वपूर्ण बिल का समर्थन करता है, तो यह विपक्षी मोर्चे (INDIA Bloc) के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। दरअसल, संसद के पिछले सत्र में विपक्ष ने एकजुट होकर 131वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया था, जिसके चलते यह बिल सदन में पास नहीं हो सका था। लेकिन अब सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में इस विधेयक को दोबारा लाने की तैयारी में है, और इस बार शरद पवार की पार्टी का रुख बदला हुआ नजर आ रहा है।
सुप्रिया सुले ने क्या कहा? ‘शर्तों’ के साथ समर्थन के मिले मजबूत संकेत
बुधवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए सुप्रिया सुले ने हालांकि यह साफ किया कि अभी पार्टी ने इस पर कोई अंतिम या आधिकारिक फैसला नहीं लिया है। लेकिन उनके बयानों से पार्टी की आगे की रणनीति साफ झलक रही थी। सुले ने कहा, “अगर सरकार सभी राज्यों में 50 प्रतिशत लोकसभा सीटों की बढ़ोतरी का स्पष्ट खाका पेश करती है और यह सुनिश्चित करती है कि किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा, तो हम इस बिल का समर्थन करने पर विचार करेंगे”। यह शर्त गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पूर्व में दिए गए उस आश्वासन के समान है, जिसमें उन्होंने राज्यों के प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने की बात कही थी।
देर रात हुई गुप्त बैठकों ने बढ़ाईं धड़कनें, क्या फिर एक हो रही है एनसीपी?
इस कूटनीतिक हलचल के पीछे केवल संसद के बिल ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के भीतर चल रही सियासी खिचड़ी भी बड़ी वजह मानी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में शरद पवार गुट और अजीत पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहद गोपनीय बैठकें हुई हैं। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर देर रात नेताओं की मुलाकात की खबरों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है कि क्या एनसीपी के दोनों गुट एक बार फिर साथ आ सकते हैं। हालांकि, सुप्रिया सुले ने इस मुलाकात को केवल अपने क्षेत्र के प्रशासनिक काम से जुड़ा बताया है।
कांग्रेस ने चेताया, पी. चिदंबरम बोले- यह अपने जमीर के साथ धोखा होगा
इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस संभावित समझौते पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर बीजेपी पर क्षेत्रीय दलों को लुभाने का आरोप लगाया है। उन्होंने शरद पवार की एनसीपी (SP) और डीएमके (DMK) जैसी पार्टियों से अपील की है कि वे इस बिल का समर्थन न करें। चिदंबरम का तर्क है कि वर्तमान परिसीमन फॉर्मूले से उन राज्यों को गंभीर नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का पूरी तरह पालन किया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद सत्र पर टिकी हैं।
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