News India Live, Digital Desk: आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता (Deputy Leader) पद से हटाए जाने के बाद अब सबकी नजरें उनके उत्तराधिकारी अशोक कुमार मित्तल पर टिकी हैं। पंजाब से राज्यसभा सांसद और देश की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटी में से एक के मालिक अशोक मित्तल का फर्श से अर्श तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
एक छोटी दुकान से संसद तक का सफर
अशोक मित्तल का जन्म पंजाब के जालंधर में एक साधारण परिवार में हुआ था।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता स्वर्गीय बलदेव राज मित्तल ने जालंधर कैंट में ‘लवली स्वीट्स’ नाम से एक छोटी सी मिठाई की दुकान से कारोबार शुरू किया था।
शिक्षा जगत में क्रांति: अशोक मित्तल ने मिठाई के पारिवारिक व्यवसाय को शिक्षा के क्षेत्र में बदला। उन्होंने 2005 में फगवाड़ा (पंजाब) में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) की स्थापना की, जो आज 600 एकड़ में फैली है और जहां 50 से अधिक देशों के छात्र पढ़ते हैं।
राजनीतिक सफर: मित्तल 2022 में सक्रिय राजनीति में आए, जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद उन्हें राज्यसभा के लिए नामांकित किया।
करोड़ों की संपत्ति के मालिक (Assets)
अशोक मित्तल देश के सबसे अमीर सांसदों में गिने जाते हैं। 2022 में राज्यसभा नामांकन के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार:
कुल संपत्ति: अशोक मित्तल और उनकी पत्नी रश्मि मित्तल की कुल घोषित संपत्ति ₹495 करोड़ से अधिक थी।
जंगम और अचल संपत्ति: उनके पास करोड़ों रुपये के शेयर, ज्वेलरी और बैंक बैलेंस के साथ-साथ जालंधर और आसपास के इलाकों में व्यापक व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियां हैं।
लक्जरी गाड़ियां: उनके काफिले में कई महंगी और लग्जरी गाड़ियां शामिल हैं।
संसद में अब तक का प्रदर्शन
महत्वपूर्ण समितियां: राज्यसभा सदस्य के रूप में मित्तल रक्षा (Defence) और वित्त (Finance) संबंधी संसदीय समितियों के सदस्य रह चुके हैं।
हालिया उपलब्धि: फरवरी 2026 में उन्हें ‘भारत-अमेरिका संसदीय मैत्री समूह’ (India-USA Parliamentary Friendship Group) का सदस्य नियुक्त किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय दौरा: पिछले साल वे डीएमके सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रूस, स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों के दौरे पर भी गए थे।
क्यों मिली राघव चड्ढा की जगह?
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अशोक मित्तल की छवि एक गंभीर, संतुलित और तार्किक वक्ता की है। शिक्षा और उद्योग जगत में उनके गहरे अनुभव का लाभ उठाने के लिए पार्टी ने उन्हें उच्च सदन में उपनेता की जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि, राघव चड्ढा को हटाए जाने के पीछे ‘अनुशासन’ और पार्टी नेतृत्व से उनकी ‘बढ़ती दूरी’ को मुख्य कारण माना जा रहा है। खुद मित्तल ने इस बदलाव को एक ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया है।
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