रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया को चेताया—हिंद महासागर हमारा आंगन, सुरक्षा से नहीं होगा समझौता Defence Minister Rajnath Singh warned the world – the Indian Ocean is our backyard, there will be no compromise on security

वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के इरादे पूरी तरह साफ कर दिए हैं। आंध्र प्रदेश के रणनीतिक नौसैनिक शहर विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के जांबाजों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की नीति किसी भी प्रकार की धौंस या दादागिरी की नहीं, बल्कि पूर्ण शांति, स्थिरता और सह-अस्तित्व की है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के बाहर की विस्तारवादी ताकतों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह समूचा समुद्री इलाका भारत का अपना आंगन है और अपने आंगन की संप्रभुता व सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ की आज होगी कमीशनिंग: नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ब्रह्मास्त्र

रक्षा मंत्री का यह ऐतिहासिक और बेहद आक्रामक बयान भारतीय नौसेना के छठे स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ (Mahendragiri Frigate) के नौसैनिक बेड़े में आधिकारिक रूप से शामिल होने से ठीक एक दिन पहले आया है। शनिवार यानी 11 जुलाई 2026 को इस अत्याधुनिक, रडार की नजरों से बच निकलने में सक्षम और महाविनाशक हथियारों से लैस युद्धपोत को देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। राजनाथ सिंह ने प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित इस युद्धपोत की युद्धक क्षमताओं की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय रक्षा उद्योग के आत्मनिर्भर होने का सबसे बड़ा प्रमाण है और इसके आने से सुरक्षा के मुश्किल होते वैश्विक वातावरण में भारतीय नौसेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

90 फीसदी व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा दांव पर: समुद्री निगरानी को और ज्यादा अभेद्य बनाने का लक्ष्य

हिंद महासागर के रणनीतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने देश के सामने मौजूद चुनौतियों और प्राथमिकताओं को विस्तार से साझा किया। उन्होंने तकनीकी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापारिक टर्नओवर और देश की पूरी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सीधे तौर पर इन्हीं समुद्री रास्तों पर निर्भर करती है। इसके अतिरिक्त, भारत का विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और रणनीतिक द्वीपीय इलाके हमारी आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जा सकता, जिसके लिए नौसेना अपनी चौबीसों घंटे की निगरानी प्रणाली को और अधिक आधुनिक बना रही है।

बाहरी ताकतों की मौजूदगी पर भारत की पैनी नजर: नौसेना के अदम्य साहस को राजनाथ ने किया सलाम

वैश्विक समुद्री थिएटर में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा (Geopolitical Competition) और क्षेत्र के बाहर की कुछ विशिष्ट सैन्य ताकतों की अवांछित गतिविधियों पर चिंता जताते हुए रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारतीय नौसेना हिंद महासागर में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा कर रही है और समुद्री लुटेरों व मिसाइल हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रही है, उसने भारत को वैश्विक पटल पर एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ के रूप में स्थापित कर दिया है। राजनाथ सिंह ने जवानों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारतीय नौसेना देश के आर्थिक और सामरिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है और किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैयार है।

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