News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह कानून अन्य राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश और गुजरात) के कानूनों से काफी मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें बच्चों के अधिकारों और ‘प्रलोभन’ की परिभाषा को लेकर कुछ विशेष बदलाव किए गए हैं।
1. बच्चों के लिए विशेष प्रावधान (Rights of Children)
विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण और अनूठी धारा धारा 5 है, जो ‘अवैध’ धर्मांतरण से हुए विवाह से जन्मे बच्चों के बारे में है:
धर्म का निर्धारण: यदि कोई विवाह अवैध धर्मांतरण के कारण हुआ है, तो उस शादी से जन्मे बच्चे का धर्म वही माना जाएगा जो उसकी माँ का विवाह से पहले का मूल धर्म था।
उत्तराधिकार का अधिकार: बच्चा अपने माता-पिता दोनों की संपत्तियों में विरासत (Inheritance) का हकदार होगा।
कस्टडी: बच्चे की कस्टडी माँ के पास रहेगी, जब तक कि अदालत कोई और निर्देश न दे।
2. सजा और जुर्माना (Penalties)
सामान्य धर्मांतरण: दोषी पाए जाने पर 7 साल की कैद और ₹1 लाख से ₹5 लाख तक का जुर्माना।
वल्नरेबल ग्रुप: यदि पीड़ित कोई नाबालिग, महिला, या SC/ST समुदाय से है, तो सजा 7 साल और जुर्माना ₹5 लाख तक होगा।
सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion): 2 या अधिक लोगों के एक साथ धर्मांतरण पर 7 साल की जेल और ₹5 लाख जुर्माना।
दोबारा अपराध: यदि कोई व्यक्ति या संस्था दोबारा अपराध करती है, तो सजा 10 साल और जुर्माना ₹7 लाख तक बढ़ सकता है।
3. ‘प्रलोभन’ और ‘बल’ की विस्तृत परिभाषा
विधेयक में ‘प्रलोभन’ (Allurement) को बहुत व्यापक बनाया गया है:
इसमें नकद, उपहार, मुफ्त शिक्षा (धार्मिक संस्थानों में), बेहतर जीवनशैली का वादा, और ‘दैवीय उपचार’ (Divine Healing) के दावे शामिल हैं।
महाराष्ट्र के बिल में एक नई बात यह है कि एक धर्म को दूसरे धर्म से श्रेष्ठ बताना या किसी धर्म की रस्मों को हानिकारक तरीके से पेश करना भी प्रलोभन या दबाव माना जाएगा।
4. अनिवार्य नोटिस और प्रक्रिया
60 दिन पूर्व सूचना: धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति और समारोह आयोजित करने वाली संस्था को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को नोटिस देना होगा।
पब्लिक ऑब्जेक्शन: प्रशासन इस नोटिस को सार्वजनिक बोर्ड पर लगाएगा और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां आमंत्रित करेगा।
सत्यापन: धर्मांतरण के 21 दिनों के भीतर जिला अधिकारियों को एक घोषणा पत्र (Declaration) जमा करना होगा।
5. शादी और कानूनी स्थिति
यदि कोई विवाह केवल धर्मांतरण के उद्देश्य से किया गया है, तो सक्षम अदालत उस विवाह को शून्य (Null and Void) घोषित कर सकती है।
धर्मांतरण गैर-कानूनी नहीं था, यह साबित करने की जिम्मेदारी (Burden of Proof) उस व्यक्ति पर होगी जिसने धर्मांतरण कराया है।
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