भारत देगा श्रीलंका को एयर डिफेंस सिस्टम? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कोलंबो दौरे पर इन 3 अहम समझौतों पर हो सकती है बड़ी चर्चा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगामी तीन दिवसीय आधिकारिक श्रीलंका दौरे को लेकर रक्षा गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है। भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। इस उच्च स्तरीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा होने की संभावना है, जिसमें सबसे बड़ा आकर्षण श्रीलंका को भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति से जुड़ा समझौता हो सकता है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की यह साझेदारी रणनीतिक रूप से मील का पत्थर साबित हो सकती है, जिससे चीन के बढ़ते दखल के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है।

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 8 से 10 सितंबर तक श्रीलंका की राजधानी कोलंबो के आधिकारिक दौरे पर रहने वाले हैं, जहां वे श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं की अगुवाई करेंगे। पिछले कुछ दशकों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली ऐसी उच्च स्तरीय रणनीतिक यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंधों को एक नया आयाम देगी। वर्ष 2022 के भयंकर आर्थिक संकट के दौरान भारत ने जिस तरह से सबसे पहले आगे बढ़कर श्रीलंका को वित्तीय, खाद्य और मानवीय सहायता पहुंचाई थी, उसके बाद से दोनों पड़ोसी देशों के आपसी रिश्तों में अभूतपूर्व मजबूती आई है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब दोनों देश अपनी रक्षा साझेदारी को केवल ट्रेनिंग और संयुक्त अभ्यासों तक सीमित रखने के बजाय एक ठोस और संस्थागत स्वरूप देने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और डोमेन अवेयरनेस को और ज्यादा पुख्ता किया जा सके।

श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की इस यात्रा के दौरान मुख्य रूप से तीन प्रमुख रक्षा समझौतों और ज्ञापनों पर मुहर लगने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण समझौता भारतीय एयर-डिफेंस गन और सुरक्षा उपकरणों की श्रीलंका को सप्लाई से जुड़ा हुआ है, जिससे श्रीलंका अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा को चाक-चौबंद कर सके। इसके अलावा दूसरा अहम समझौता दोनों देशों के कैडेट कॉर्प्स के बीच आपसी आदान-प्रदान और संपर्कों को बढ़ावा देने के लिए तय किया गया है। वहीं, तीसरे और अंतिम समझौते के तहत श्रीलंका डिफेंस कॉलेज और भारत के प्रमुख रक्षा संस्थानों के बीच शैक्षणिक और रणनीतिक प्रशिक्षण के स्तर पर आपसी सहयोग को और अधिक व्यापक बनाने पर सहमति बनने की उम्मीद है।

श्रीलंका के रणनीतिक बंदरगाह और भौगोलिक स्थिति लंबे समय से वैश्विक महाशक्तियों, विशेषकर चीन की आर्थिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का केंद्र रहे हैं, जिसे लेकर भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नजरें हमेशा टिकी रहती हैं। ऐसे समय में जब भारत अपने दक्षिणी पड़ोसी को एयर डिफेंस सिस्टम जैसी आधुनिक और संवेदनशील रक्षा तकनीक मुहैया कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो यह स्पष्ट संदेश है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा के मामले में सबसे भरोसेमंद और मजबूत साझीदार है। यह पूरा घटनाक्रम भारत के उस बड़े रणनीतिक दृष्टिकोण को भी गति देता है जिसके तहत हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता, पारदर्शी विकास और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन रक्षा समझौतों के धरातल पर उतरने से न केवल श्रीलंका की सैन्य क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

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