भारत को 90 दिनों तक सुरक्षित रखने की तैयारी संसदीय समिति ने केंद्र से कहा- बढ़ाएं कच्चे तेल का बफर स्टॉक:
News India Live, Digital Desk: वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर अब और भी सतर्क हो गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मामलों की संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee) ने केंद्र सरकार को एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। समिति ने सिफारिश की है कि देश में कच्चे तेल (Crude Oil) का आपातकालीन भंडार यानी ‘बफर स्टॉक’ बढ़ाकर कम से कम 90 दिनों का किया जाना चाहिए।
अभी क्या है स्थिति और क्यों है चिंता?
वर्तमान में, भारत के पास अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 9-10 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) मौजूद है। इसके अलावा, तेल रिफाइनरियों के पास लगभग 64-65 दिनों का स्टॉक रहता है। समिति का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। यदि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन बाधित होती है, तो भारत के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
90 दिनों का स्टॉक क्यों जरूरी?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के मानकों के अनुसार, किसी भी देश के पास कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर तेल का भंडार होना चाहिए।
कीमतों पर नियंत्रण: पर्याप्त स्टॉक होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने पर भी घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
आपातकालीन स्थिति: युद्ध या समुद्री मार्गों के बंद होने की स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को रुकने से बचाया जा सकेगा।
रणनीतिक मजबूती: अधिक भंडारण क्षमता होने से भारत वैश्विक स्तर पर अपनी सौदेबाजी की शक्ति (Bargaining Power) को बढ़ा सकेगा।
नई भंडारण क्षमताओं के निर्माण पर जोर
संसदीय समिति ने सरकार से कहा है कि वह दूसरे और तीसरे चरण के Strategic Petroleum Reserves (SPR) प्रोजेक्ट्स में तेजी लाए। ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर जैसे स्थानों पर भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। समिति ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने का भी सुझाव दिया है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम
समिति ने केवल कच्चे तेल के भंडारण पर ही नहीं, बल्कि गैस ग्रिड के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के साथ इसके तालमेल पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए तेल की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसके सुरक्षित भंडार को बढ़ाना समय की मांग है।
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