देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को एक बेहद संवेदनशील मामले में सख्त निर्देश जारी किया है। अदालत ने सीबीएसई से साफ शब्दों में कहा है कि वह पश्चिम एशियाई (वेस्ट एशियन) देशों के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के एडमिशन में हो रही देरी को रोकने के लिए 12वीं क्लास की इम्प्रूवमेंट परीक्षा के नतीजे जल्द से जल्द घोषित करने के लिए ठोस और असरदार कदम उठाए। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को दोटूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता, इसलिए बोर्ड के अधिकारी चाहे दिन-रात एक करके काम करें, लेकिन आने वाले शुक्रवार तक इस पूरी समस्या का समाधान और सटीक प्लान कोर्ट के सामने पेश करें। इस आदेश के बाद सीबीएसई बोर्ड के गलियारों में खलबली मच गई है।
विदेशी छात्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, सीबीएसई की समय मांगने की दलील खारिज
यह पूरा मामला तब गरमाया जब जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने सऊदी अरब में पढ़ रहे एक विदेशी भारतीय छात्र की याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का फैसला किया। पीड़ित छात्र ने अपनी याचिका में सीबीएसई से गुहार लगाई थी कि उसकी 12वीं क्लास की इम्प्रूवमेंट परीक्षा का रिजल्ट तुरंत घोषित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि उसका पूरा साल बर्बाद होने से बच सके। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न सिर्फ सीबीएसई को कड़ा नोटिस जारी किया, बल्कि जब बोर्ड के वकील ने याचिका का जवाब तैयार करने के लिए अदालत से और अधिक समय की मांग की, तो बेंच ने उसे सिरे से ठुकरा दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 जून 2026 की तारीख तय कर दी है और तब तक हर हाल में रिजल्ट की समस्या को सुलझाने का आदेश दिया है।
यूनिवर्सिटी में एडमिशन छूटने का खतरा, वकील ने कोर्ट में बयां किया छात्रों का दर्द
अदालत में याचिकाकर्ता छात्र की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राज किशोर चौधरी ने बेंच के सामने छात्रों की चिंताओं और उनके मानसिक तनाव को रखा। उन्होंने दलील दी कि इम्प्रूवमेंट परीक्षा के परिणाम घोषित न होने के कारण छात्र के पूरे एकेडमिक करियर पर बहुत बुरा और परमानेंट असर पड़ रहा है। छात्र ने विदेशी यूनिवर्सिटीज में उच्च शिक्षा और एडमिशन के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है। अगर बोर्ड समय पर रिजल्ट जारी नहीं करता है, तो विदेशी यूनिवर्सिटीज एडमिशन विंडो बंद कर देंगी और छात्र चाहकर भी अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के मौके से हमेशा के लिए वंचित रह जाएगा। यह हजारों अन्य छात्रों के भविष्य का भी सवाल है जो इसी तरह की स्थिति से जूझ रहे हैं।
असेसमेंट स्कीम के बावजूद रिजल्ट पर क्यों लगा 'RL' का टैग? बोर्ड की चुप्पी पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद की जड़ में बोर्ड की लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल, युद्ध और अशांति के कारण पश्चिमी एशियाई देशों में पढ़ रहे हजारों छात्रों को हो रही भारी परेशानियों को देखते हुए सरकार ने एक विशेष असेसमेंट स्कीम (मूल्यांकन योजना) का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस योजना के तहत यह तय हुआ था कि कोरोना या युद्ध जैसी विपरीत परिस्थितियों में जो परीक्षाएं रद्द की गई हैं, उनके नंबर छात्रों को उनकी तिमाही, छमाही और प्री-बोर्ड परीक्षाओं में किए गए पिछले प्रदर्शन के आधार पर दिए जाएंगे। लेकिन याचिकाकर्ता छात्र का आरोप है कि बोर्ड ने बिना कोई ठोस कारण बताए उसके रिजल्ट के स्टेटस में ‘RL’ यानी (Result Later – रिजल्ट बाद में आएगा) लिख कर छोड़ दिया। जब छात्र ने इसके खिलाफ बोर्ड के चक्कर काटे, तो उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
बार-बार रिमाइंडर भेजने पर भी नहीं जागा सीबीएसई, अब कोर्ट ही आखिरी सहारा
याचिका में सीबीएसई बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि छात्र ने बोर्ड के अधिकारियों से लिखित में खास तौर पर यह अनुरोध किया था कि या तो रद्द किए गए विषयों का मूल्यांकन सरकार की नई असेसमेंट स्कीम के तहत तुरंत किया जाए, या फिर उसे योजना की धारा 18 के नियमों के तहत आयोजित होने वाली विशेष परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी जाए। छात्र ने बोर्ड को एक के बाद एक कई रिमाइंडर और शिकायतें भेजीं, लेकिन प्रतिवादियों (सीबीएसई) की ओर से कोई जवाब नहीं मिला। बोर्ड की इसी रहस्यमयी चुप्पी और लापरवाही से तंग आकर आखिरकार छात्र को देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जहां से अब सीबीएसई को सख्त हिदायत मिल चुकी है।
Comments are closed.