चंद्रशेखर आजाद का संसद में गरज रेल मंत्री से पूछा क्या गरीब के लिए ट्रेन में जगह नहीं? नगीना के लिए की ये 5 बड़ी मांगें

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News India Live, Digital Desk : रेल बजट 2026-27 पर अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए चंद्रशेखर आजाद काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे अब केवल ‘अमीरों की सवारी’ बनती जा रही है और गरीब आदमी स्टेशन पर धक्के खाने को मजबूर है।

1. जनरल और स्लीपर कोच पर सरकार को घेरा

चंद्रशेखर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर मुखातिब होते हुए कहा:

कोचों की कटौती: “आपने वंदे भारत और अमृत भारत जैसी चमचमाती ट्रेनें तो चला दीं, लेकिन साधारण ट्रेनों से जनरल और स्लीपर डिब्बे कम कर दिए। आज गरीब आदमी शौचालय के पास बैठकर यात्रा करने को मजबूर है।”

किराया वृद्धि: उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म टिकट से लेकर जनरल टिकट के दामों में चोरी-छिपे वृद्धि की गई है, जिससे दिहाड़ी मजदूरों पर बोझ बढ़ा है।

2. नगीना लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रमुख मांगें (Key Demands)

सांसद ने अपने क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी सुधारने के लिए रेल मंत्री के सामने ‘चार्टर ऑफ डिमांड’ रखा:

नगीना में ठहराव: दिल्ली-लखनऊ रूट की प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का नगीना और नजीबाबाद स्टेशनों पर ठहराव (Stoppage) बढ़ाया जाए।

नई पैसेंजर ट्रेन: नगीना से हरिद्वार और देहरादून के लिए सीधी मेमू (MEMO) ट्रेन सेवा शुरू की जाए।

रेलवे ओवरब्रिज (ROB): क्षेत्र के व्यस्त फाटकों पर जाम की समस्या से निपटने के लिए 3 नए ओवरब्रिज के निर्माण को तत्काल मंजूरी दी जाए।

स्टेशन आधुनिकीकरण: ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत नगीना स्टेशन पर यात्री सुविधाओं (जैसे लिफ्ट और एस्केलेटर) का विस्तार हो।

सुरक्षा: छोटे स्टेशनों पर महिला सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और अतिरिक्त आरपीएफ (RPF) बल की तैनाती हो।

3. रेल मंत्री का जवाब (Minister’s Response)

चंद्रशेखर की नाराजगी के बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि:

सरकार 10,000 नए नॉन-एसी कोच बनाने पर काम कर रही है ताकि आम जनता को राहत मिले।

नगीना सहित पश्चिमी यूपी के स्टेशनों के लिए विकास योजनाएं पाइपलाइन में हैं और तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) के आधार पर ठहराव दिए जाएंगे।

4. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

संसद में दिए गए इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। समर्थकों का कहना है कि चंद्रशेखर ने ‘बहुजन समाज’ और ‘मजदूर वर्ग’ की वास्तविक पीड़ा को सदन पटल पर रखा है।

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