गुजरात में ओवैसी की पार्टी की धमक भुज में AIMIM का पैनल जीता, कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी कर सबको चौंकाया

News India Live, Digital Desk: गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों में जहां एक तरफ भाजपा का एकतरफा दबदबा दिख रहा है, वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM (All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। कच्छ जिले के भुज में पार्टी ने न केवल खाता खोला है, बल्कि एक पूरे वार्ड में जीत दर्ज कर अपनी सांगठनिक ताकत का अहसास कराया है। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि AIMIM ने यह सीटें कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर हासिल की हैं।

भुज वार्ड नंबर 1: AIMIM की ऐतिहासिक जीत

रुझानों और परिणामों के अनुसार, कच्छ के भुज नगर पालिका के वार्ड नंबर 1 में AIMIM के उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है। पार्टी का पूरा पैनल (तीन उम्मीदवार) यहां से विजयी घोषित हुआ है। इस जीत के साथ ही भुज के मुस्लिम बहुल इलाकों में जश्न का माहौल है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह जीत ‘विकास और विश्वास’ की जीत है और अब वे नगर पालिका में जनता की आवाज बुलंद करेंगे।

कांग्रेस को तगड़ा झटका, भाजपा की बढ़त बरकरार

AIMIM की इस एंट्री ने सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को पहुंचाया है। भुज के जिन वार्डों को कांग्रेस अपना सुरक्षित किला मानती थी, वहां ओवैसी के उम्मीदवारों ने सेंधमारी कर दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ‘आप’ और ‘AIMIM’ की मौजूदगी ने विपक्षी वोटों का ध्रुवीकरण कर दिया, जिसका सीधा फायदा कहीं भाजपा को मिला तो कहीं स्थानीय स्तर पर AIMIM खुद बाजी मार ले गई।

अहमदाबाद और अन्य शहरों में प्रदर्शन

अहमदाबाद: अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के मुस्लिम बहुल वार्डों (जैसे जमालपुर और मकतंपुरा) में भी AIMIM ने कड़ी टक्कर दी है। पिछले चुनाव के प्रदर्शन को दोहराते हुए पार्टी ने कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर अपनी बढ़त बनाए रखी है।

भरूच और गोधरा: इन नगरपालिकाओं में भी पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जिससे यह साफ है कि AIMIM अब केवल अहमदाबाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्तर और मध्य गुजरात के नगर निकायों में भी अपना आधार बढ़ा रही है।

2027 विधानसभा चुनाव के लिए ‘अलार्म’?

स्थानीय निकाय चुनावों में AIMIM के इस प्रदर्शन को 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव के ट्रेलर के रूप में देखा जा रहा है। ओवैसी की रणनीति साफ है शहरी निकाय चुनावों के जरिए अपने आधार को मजबूत करना और फिर विधानसभा चुनावों में एक निर्णायक ‘वोट कटर’ या ‘किंग मेकर’ की भूमिका में आना।

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