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- गुवाहाटी के भरलूमुख में विशेष कार्यक्रम आयोजित
- “कावरी बंधन” पुस्तक का लोकार्पण
- “सती राधिका शांति दिवस” पर विशेष व्याख्यान
- लगभग 150 इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति
समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, ३ मई: 17 बोहाग एवं बुद्ध पूर्णिमा तिथि के शुभ अवसर पर गुवाहाटी के भरलूमुख स्थित संघसाधक मधुकर लिमये सभागार में “कावरी बंधन” पुस्तक विमोचन तथा “सती राधिका शांति दिवस” के उपलक्ष्य में एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम द्वारा कामरूप महानगर समिति के सहयोग से किया गया।
“कावरी बंधन” नामक पुस्तक के लेखक माँ कामाख्या मंदिर के पूर्व डोलोई श्री जदुनाथ शर्मा हैं। इस पुस्तक का विधिवत विमोचन उत्तर लखीमपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मुकुल चंद्र बोरा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद एवं असम लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. निरंजन कलिता ने “सती राधिका शांति दिवस की प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में कनक चंद्र शर्मा (पूर्व उपाध्यक्ष, असम साहित्य सभा) तथा कबिंद्र प्रसाद शर्मा (डोलोई, माँ कामाख्या मंदिर) भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत युवा कलाकार आराध्या बर्मन एवं आश्वास आयुष्मान द्वारा मंगलाचरण और दुर्गा स्तुति के साथ हुई, जिससे वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।
यह आयोजन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय महासचिव हेमंत धिंग मजूमदार के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संदर्भ में “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक समरसता की आवश्यकता पर बल दिया तथा सती राधिका के ऐतिहासिक चरित्र को प्रेरणा का स्रोत बताया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रोजी पाठक ने किया, जबकि अंत में प्रांजल दास ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन कल्याण मंत्र के पाठ के साथ हुआ।
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