जाना मुकेश अंबानी का अमेरिका और आना भारत में भूचाल

कई बड़ी घटनाएं सुंदर इत्तफाकों की महज़ बॉयोप्रोडक्ट होती हैं। कोई महीने भर पहले की मुकेश अंबानी की अमेरिका यात्रा को भी आप इसी श्रेणी में रख सकते हैं। बेहद भरोसेमंद सूत्रों के दावों पर यकीन किया जाए तो अंबानी की कंपनी रिलायंस ने पिछले दिनों अमेरिका की एक बड़ी पीआर कंपनी की सेवाएं ली हैं। कारण बताया गया कि रिलायंस समूह को अमेरिका में अपना विस्तार कराना है। पिछले महीने मुकेश अंबानी जब वाशिंगटन डीसी पहुंचे तो उनके सम्मान में वहां के एक सीनेटर ने ‘ब्रेकफास्ट’ रखा, जिसमें कुल 8 अन्य सीनेटर भी शामिल हुए। कहा जाता है कि इन अमेरिकी सीनेटर गण ने अंबानी को अपने संबंधित राज्यों में आने का न्यौता दिया, यह कहते हुए कि ‘अंबानी वहां आएं और उनके राज्यों में नए रोजगारों का सृजन करें।’ कहते हैं इसके जवाब में मुकेश ने कहा-’रिलायंस इज़ ऑल्वेज योर फ्रेंड’। फिर रात में अमेरिकी कांग्रेस मैन की ओर से एक डिनर रखा गया जिसमें 30 से ज्यादा सीनेटर शामिल हुए। इसी कड़ी में ‘इंडियन अमेरिकन कॉकस’ यानी ‘समोसा कॉकस’ ने आने वाली गर्मियों में अपने एक बड़े कार्यक्रम में मुकेश अंबानी को बतौर चीफ गेस्ट आमंत्रित किया है। सनद रहे कि इंडियन अमेरिकन के इस समोसा कॉकस की अमेरिकी राजनीति में बेहद पूछ है, इस कॉकस को गठित करने वालों में देश की उप राष्ट्रपति कमला हैरिस, सीनेटर राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, डॉक्टर एमी बेरा और प्रमिला जयराम जैसे नामचीन इंडियन अमेरिकन शामिल हैं। क्या इसे भी महज़ एक इत्तफाक मान जाए कि अंबानी की इस अमेरिका यात्रा के महीने भर बाद ही अमेरिका स्थित ‘हिंडनबर्ग रिसर्च’ की अनुसंधानकारी रिपोर्ट आ जाती है और अडानी समूह को महज़ दो दिनों के अंदर 4.17 लाख करोड़ रुपयों का झटका लग जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं इसके साथ अडानी की ‘ग्रीन एनर्जी’ में अरबों का निवेश करने वाले दो बड़े वेल्थ मैनेजर ‘ब्लैक रॉक’ और ‘ब्लैक स्टोन’ कहते हैं वे अडानी की ग्रीन एनर्जी में अपने निवेश का रिव्यू करेंगे। आप सिर्फ कड़ियों को जोड़ें और भारतीय औद्योगिक समूहों की प्रतिस्पद्र्धा के नए चेहरे उजागर हो जाएंगे।

24 में मोदी दो जगहों से उतर सकते हैं मैदान में

2024 के आम चुनाव में क्या मोदी वाराणसी के साथ-साथ दक्षिण भारत की किसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं? भाजपा से जुड़े सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो इसका जवाब ’हा’ में है। वजह बेहद साफ है, इस वक्त उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों में भाजपा का ग्राफ उफान पर है, पूरब के राज्यों में भी धीरे-धीरे भाजपा ने अपनी पैठ बना ली है। भाजपा की असल चिंता दक्षिण की 128 सीटों को लेकर है जहां कांग्रेस समेत अन्य क्षेत्रीय दलों का जलवा बरकरार है। भाजपा को भरोसा है कि ’उसके तरकश में मोदी नाम का वह तीर जो इन तमाम चुनौतियों का एकमेव उत्तर है।’ भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि ’2024 के आम चुनावों में तमिलनाडु की रामनाथपुरम सीट मोदी की पसंदीदा सीटों में शुमार है, जहां से वे चुनाव लड़ने की सोच सकते हैं।’ भाजपा को दक्षिण भारत में अपने विस्तार के लिए ऐसे ही किसी एक ‘मास्टर स्ट्रोक‘ की जरूरत है। रामनाथपुरम के अलावा मदुरै और कोयंबटूर में भी भगवा पार्टी अभी से वहां जनता का मूड भांपने में लगी है। बात रामनाथपुरम की करें तो 2024 के चुनाव में यहां भाजपा तीसरे स्थान पर थी, पर 2019 का लोकसभा चुनाव आते-आते भाजपा यहां मुख्य लड़ाई में शामिल हो गई और वह दूसरे स्थान पर रही। दक्षिण भारत किस कदर मोदी और भाजपा के एजेंडे में है इसे आप दो उदाहरणों से समझ सकते हैं। काशी में बड़े जोर-शोर से ‘तमिल संगम’ की शुरूआत हुई और दिल्ली में ‘सेंट्रल विस्टा’ के उद्घाटन के मौके पर पीएम ने तमिल महाकवि भारतियार यानी सुब्रह्मण्यम भारती की कविता का पाठ किया। मोदी की भाव-भंगिमाएं और उनके आचरण खुद ही उनकी आगे की रणनीतियों की चुगली  कर देते हैं।

भागवत से असहमत संघ का एक वर्ग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग शायद ही कभी अपने लिए चिन्हित परिधियों का अतिक्रमण करते हैं। पर पिछले कुछ समय में संघ की इन मान्य परंपराओं का हनन हुआ है। संघ का ही एक वर्ग संघ प्रमुख के ‘सर्वधर्म सद्भाव’ से ओत-प्रोत उनकी उदारवादी सोच को पचा नहीं पा रहा है। गजब तो तब हो गया जब छोटे-मोटे मेंढकों ने भी भागवत के खिलाफ टरटराना शुरू कर दिया। एक हिंदूवादी यू-ट्यूबर संदीव देव तो बकायदा दिल्ली पुलिस के पास भागवत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंच गए, इस शिकायत में उन्होंने भागवत के अलावा पांचजन्य के संपादक प्रफुल्ल केतकर और आर्गनाइजर के संपादक हितेश शंकर का भी नाम लिया है। इस यू-ट्यूबर का आरोप है कि ’भागवत ने आरएसएस के मुखपत्र को दिए गए अपने हालिया इंटरव्यू में समलैंगिकता का समर्थन किया है तथा अपनी बात रखने के लिए इसे हिंदू धार्मिक पात्रों के साथ जोड़ा है।’ देव ने भागवत पर श्रीकृष्ण पर भी भड़काऊ टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। देव का कहना है कि ’संघ प्रमुख ने महाभारत काल के पात्र ‘हम्सा’ और ‘डिंबक’ को ’गे कपल’ के रूप में चित्रित किया है, जो सरासर गलत है।’

किसके साथ जाएगी शिवसेना?

शिवसेना के अंदर अपने नए गठबंधन साथी चुनने का भारी दबाव जान पड़ता है। दरअसल, जब संजय राउत जेल से बाहर आए उसी वक्त भाजपा से जुड़े एक सबसे बड़े उद्योगपति मातोश्री पहुंचे, षाम के वक्त। कहते हैं वह उद्योगपति भाजपा का एक साफ संदेषा लेकर उद्धव के पास आए थे कि ’शिवसेना कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन तोड़ लें, क्योंकि यह एक नेचुरल गठबंधन नहीं है।’ कहते हैं इसके बाद ही उद्धव ने आगामी बीएमसी चुनाव में अपनी पार्टी का गठबंधन प्रकाश अंबेडकर की ‘वंचित बहुजन अघाड़ी’ के साथ कर लिया है। वहीं राकांपा और कांग्रेस का आपस में तालमेल भी पक्का हो गया है। शिवसेना ने कांग्रेस के समक्ष अपना रुख कड़ा करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ’2024 के आम चुनाव में अगर महाअघाड़ी विकास का गठबंधन कायम भी रहता है तो शिवसेना सबसे ज्यादा 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, 16 सीटें वह एनसीपी के लिए छोड़ देगी बाकी सीटों पर कांग्रेस को संतोष करना पड़ेगा।’ भाजपा को पूरा भरोसा है कि 2024 का चुनाव उद्धव उनके साथ मिल कर ही लड़ेंगे। एकनाथ शिंदे को लेकर भाजपा का मानना है कि भले ही वे उद्धव की शिवसेना से विधायक व सांसद तोड़ लाए हों, पर कार्यकर्ता उद्धव की शिवसेना में ही रह गए हैं, शायद इसीलिए भाजपा को उद्धव की शिद्दत से दरकार है।

बिहार कांग्रेस क्यों है बदहाल

कांग्रेस के नए नवेले राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जानते हैं कि बिहार को लेकर राहुल गांधी के मन में कुछ अतिरिक्त उत्साह है। सो, वे बिहार कांग्रेस में एक नई जान फूंकने के लिए तत्पर रहते हैं। इस शुक्रवार को उन्होंने बिहार कांग्रेस के पटना स्थित प्रदेश मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित एक कार्यशाला को वर्चुअल रूप से संबोधित किया। यह कार्यशाला कांग्रेस के ’हाथ जोड़ो’ कार्यक्रम को लेकर आयोजित थी, जिसमें बिहार कांग्रेस के 500 डेलीगेट्स को षामिल होना था, यहां कुर्सियां भी पांच सौ के आसपास लगाई गई थीं। पर कहते हैं इस कार्यशाला में बमुश्किल 150-200 डेलीगेट्स ही जुटे, फिर आनन-फानन में पीछे की सारी कुर्सियां हटा ली गईं। इसके बाद बिहार कांग्रेस में फिर से बवाल हो गया कि फर्जी डेलीगेट्स के नाम सूची में से काटे जाएं। इसके तुरंत बाद खड़गे ने बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश सिंह को दिल्ली तलब कर लिया। इस कार्यक्रम में बिहार कांग्रेस के एक नेता अनिल शर्मा ने यह कह कर तूफान मचा दिया कि ’हाथ जोड़ो’ नहीं कांग्रेस को ‘दिल जोड़ो’ अभियान चलाना चाहिए।’ शर्मा जब यह कह रहे थे तो कार्यक्रम का लाइव प्रसारण हो रहा था।

राव की कांग्रेस से एलर्जी

तेलांगना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव विपक्षी एका का नया सिरमौर बनना चाहते हैं, पर वे यह भी चाहते हैं कि उनके इस विपक्षी एका के मंच पर कांग्रेस को कोई जगह मिले। सो, उनकी पूरी कोशिश है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का जेडीएस के संग गठबंधन न हो। कमोबेश यही कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार की भी भावना है, इसको लेकर राव की डीके से दो-तीन राऊंड की बात भी हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि राव ने अपने पैसों से मैसूर क्षेत्र में जेडीएस के लिए एक जनमत सर्वेक्षण भी कराया है, यह सर्वेक्षण बताता है कि मैसूर रीज़न में जेडीएस की सबसे ज्यादा सीटें आ रही हैं। दूसरे नंबर पर यहां कांग्रेस हैं और तीसरे नंबर पर भाजपा। मल्लिकार्जुन खड़गे निरंतर देवेगौड़ा के संपर्क में हैं, उन्होंने 30 जनवरी को देवेगौड़ा को जम्मू-कश्मीर आने का न्यौता भी दिया था, जहां अपनी राहुल भारत जोड़ो यात्रा के प्रथम चरण का समापन कर रहे हैं। पर देवेगौड़ा ने वहां आने में असमर्थता जताते हुए, राहुल को अपनी शुभकामनाएं जरूर भेज दी हैं। वहीं भाजपा है जो देवेगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी के निरंतर संपर्क में हैं और उन्हें साथ आने को मना रही है। कुमारस्वामी भी कांग्रेस के बजाए भाजपा को ज्यादा पसंद करने वालों में शुमार हैं।

 

और अंत में

 भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के शायराना अंदाज के लोग दीवाने हैं, वे तो आधिकारिक बैठकों में भी शेरो-शायरी से माहौल बना देते हैं, अभी पिछले दिनों बसपा सुप्रीमो  मायावती ने जब ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पर हमला बोला, तो राजीव कुमार ने बेहद संजीदगी से शायराना अंदाज में बहिन जी को जवाब दिया कि अगर ईवीएम बोल पाते तो वे कहते-’जिसने तेरे सिर पर तोहमत रखी है, मैंने उसके घर की भी लाज रखी है।’  

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