Survey–आखिर पुरुषों को ही वरीयता क्यों : रैंडस्टैड वर्कमोनिटर के सर्वेक्षण का निष्कर्ष

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आखिर पुरुषों को ही वरीयता क्यों
रैंडस्टैड वर्कमोनिटर के सर्वेक्षण का निष्कर्ष, कॉर्पोरेट सेक्टर में समान रूप से योग्य होने पर भी नहीं मिलता वेटेज
ontimenews ने किया सर्वे : सर्वे मे महिलाओ ने रखे अपने विचार 
इंदौर। कॉर्पोरेट सेक्टर में भले ही महिला और पुरुष किसी तरह की नौकरी के लिए समान रूप से योग्य हों लेकिन अक्सर वरीयता पुरुषों को दी जाती है। यह रैंडस्टैड वर्कमोनिटर के सर्वेक्षण का एक निष्कर्ष है। इस सर्वेक्षण में भारत में 55 फीसदी लोगों ने इस बात का संकेत दिया कि जब पुरुष एवं महिलाएं समान तरह की जिम्मेदारियों के लिए समान रुप से योग्य हों तब पुरुषों को ही वरीयता दी जाती है। सर्वेक्षण में 61 फीसदी पुरुषों और 47 फीसदी महिलाओं ने ऐसी बात कही।  भेदभाव की कई रिपोर्टों के बावजूद इस सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत में 91 फीसदी मामलों में एक तरह की भूमिकाओं के लिए पुरुष और महिलाओं को समान वेतन मिलता है। इसे लेकर प्रोफेशनल और स्टूडेंट्स ने बताई मन की बात-
उच्च पदों पर महिलाओं की संख्या बेहद कम
कंपनियों में नीचे के पदों के अलावा उच्च पदों पर भी महिलाओं की संख्या बेहद कम है। जबकि महिलाएं अब जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। सेंट्रल गवर्नमेंट भी इसे लेकर बार-बार नसीहत दे चुकी है। इसके बावजूद कोई फर्क देखने को नहीं मिलता।
सोनम शर्मा, स्टूडेंट और प्रोफेशनल
कानूनी बाध्यता की वजह से कर रहे नियम का पालन
वर्ष 2013 में ही सरकार किसी भी लिस्टेड कंपनी में कम से कम एक महिला निदेशक का होना अनिवार्य कर चुकी है। अभी भी बड़ी संख्या उन कंपनियों की है जो इसे सिर्फ कानूनी बाध्यता की वजह से नियमों का पालन करती हैं। यदि कंपनी महिलाओं को अवसर देती है तो वे हर तरह की भूमिका निभाने को तैयार है।
साक्षी उपाध्याय, स्टूडेंट
अपने ही परिवार की महिलाओं को बना रखा है निदेशक
कई कंपनियों और उनके प्रमोटर ने अपने परिवार की महिलाओं को ही निदेशक के रूप में जगह देकर महज खानापूर्ति की है। जबकि समाज में बदलाव तेजी से हो रहा है, लेकिन कॉर्पोरेट सेक्टर में आज भी कहीं न कहीं महिला-पुरुष के भेदभाव स्पष्ट नजर आते है।
पिनाली वर्मा, प्रोफेशनल
समान जिम्मेदारी के बाद भी नहीं मिलता वेटेज
महिलाएं अब हर प्रोफेशन में अपने आप को बेहतर साबित कर रही है। महिला-पुरुष दोनों को कॉर्पोरेट सेक्टर में भले ही समान वेतन मिलता हो लेकिन दोनों को समान जिम्मेदारी मिलने के बाद भी वह वेटेज नहीं दिया जाता जो पुरुषों को मिलता है। 
अंजली पाहवा, स्टूडेंट

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