आजाद लब :- हुज़ूर आते -आते बहुत देर कर दी … ; विश्वबंधु

अब यह गाना यहाँ फिट बैठा है – बहुत देर से दर पे आंख लगी थी , हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी l  पार्टी अपने अस्तित्व की और अब एक निर्णायक लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है उसी का नतीजा प्रियंका गाँधी का कांग्रेस मे महासचिव बन कर सक्रिय राजनीती मे आना हुआ l प्रियंका, नेहरु – गाँधी परिवार की आठवी सदस्य है जो पार्टी मे सक्रिय राजनीत करेंगी l अभी तक सभी को मालूम था की प्रियंका पर्दे के  पीछे से पार्टी को सुझाव देती थी और अपने भाई और माँ की संसदीय सिट का काम देखती थी l साथ ही प्रियंका गाँधी अपना नियंत्रण पूर्ण रूप से पार्टी पर रखती थी l परन्तु प्रियंका का पार्टी मे ऐसे शामिल होना भी ताजुब की बात है , क्योकि प्रियंका गाँधी परिवार की पहली ऐसी सदस्य होंगी  जो सिमित अधिकार के साथ पार्टी मे आई है l प्रियंका को सिर्फ पूर्वी यूपी का प्रभारी बनाया गया है यह चौकाने वाला फैसला लगता है क्योकि प्रियंका आई तो बहुत देर से और वो भी बहुत ही काम पॉवर ले कर l

 

प्रियंका के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी आधी यूपी का प्रभार दिया गया है मतलब प्रियंका के सहयोगी के रूप मे सिंधिया को यूपी भेजा गया है l मतलब साफ़ है प्रियंका और सिंधिया दोनों को यूपी दिया गया है और दोनों को एक दुसरे का सहयोगी बना कर भेजा गया है l या फिर एक मतलब यह भी निकल रहा है की मध्यप्रदेश मे कांग्रेस की आपसी गुटबंदी को ख़त्म करने के लिए राहुल गाँधी ने सिंधिया का पार्टी मे कद भी बढ़ा दिया और कमलनाथ को फ्री हैण्ड भी दे दिया , अगर ऐसा है तो राहुल को एक परिपक्व राजनेता माना जा सकता है l परन्तु यह वक़्त बतायेगा की हकीक़त क्या है l 

 

वही पूर्वी यूपी की बात करे तो देश को यहाँ से अभी तक 8 प्रधानमंत्री मिले है l मोदी और योगी दोनों का ही संसदिये स्थान पूर्वी यूपी मे आता है l पूर्वांचल कहे जाने वाले इस एरिया मे बीजेपी बहुत ही मजबूत है और यहाँ कांग्रेस को सिर्फ दो सीते है l प्रियंका गाँधी पार्टी मे तब आई है जब पार्टी अपने सायद सबसे बुरे समय से गुजर रही है और जो यूपी कभी कांग्रेस का किला था वह सिर्फ उसका नाम ही शेष बचा है l पार्टी को वापिस यूपी मे खड़ा करना और खोया हुआ जनाधार वापिस पाना बहुत ही मुस्किल है जब अखिलेश और मायावती साथ हो चले है और बीजेपी का अजय रथ अभी पूरे भारत मे बिना लगाम दौड़ रहा है l कांग्रेस का पिछले चुनाव मे यूपी मे सिर्फ 7.53 % वोट मिले थे जो की वह की लोकल पार्टियो से काफी काम थे l 

 

परन्तु प्रियंका की लोकप्रियता और उनकी सर्वमान्य छवि पार्टी को फ़ायदा पंहुचा सकती है और कांग्रेस को वापिस उसका गौरव दिलाने मे अहम् भूमिका निभा सकती है l साथ ही प्रियंका के सक्रिय राजनीत मे आने से भारत मे एक और प्रधानमंत्री के संभावित उम्मीदवार की गिनती बढ़ गई और कांग्रेस पार्टी मे जो अभी तक राहुल एकलौता इस पद के दावेदार थे वहा एक और दावेदार की एंट्री हो गई जो राहुल से ज्यादा लोकप्रिय और इंदिरा गाँधी जैसी मजबूत छवि वाली मानी जाती है l अब तो वक़्त ही बताएगा की देश की राजनीत कैसी होगी और बीजेपी प्रियंका का काट क्या लाएगी और प्रियंका से कांग्रेस को ओर खुद प्रियंका को कितना फ़ायदा होता है l 

 

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